तुलसी का प्रयोग कब कैसे और क्यों करना चाहिए - Raambaanilaj.com

Saturday, 2 September 2017

तुलसी का प्रयोग कब कैसे और क्यों करना चाहिए

तुलसी का प्रयोग कब कैसे और क्यों  करना चाहिए 
 चिकित्सकों के अनुसार तुलसी बल बढ़ाने वाली, हृदयोत्तेजक, सूजन को पचाने वाली एवं सिर दर्द को ठीक करने वाली होती है। तुलसी के पत्ते बेहोशी में सुंघाने से बेहोशी दूर होती है। इसके पत्ते चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। तुलसी के सेवन से सूखी खांसी दूर होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसके तेल में कुछ सीटोस्टेराल, स्टीयरिक, लिनोलक, पामिटिक, लिनोलेनिक और ओलिक वसा अम्ल भी होते हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, टैनिन, सेवानिन और एल्केलाइड़स भी होते हैं।     सिर्फ ३ दिन लगते है बवासीर को जड़ से ख़त्म करने में. -जाने ये है उपाए
: उपचार : 
1. वीर्यवृद्धि (धातु में वृद्धि) : तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाकार खाएं और इसके बाद 1 कप दूध पीएं। इसका सेवन नियमित रूप से सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बंधी धातु की वृद्धि होती है। इससे नपुंसकता (नामर्दी) और शीघ्रपतन (धातु का शीघ्र निकल जाना) की समस्याएं दूर हो जाती है।

2. स्वप्नदोष (नाईटफाल) : तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में रात को सोने से पहले नियमित रूप से कुछ सप्ताह तक पीने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) : तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसका सेवन करें। इससे शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य पुष्ट (गाढ़ा) होता है। 

3. सिर का दर्द : नींबू और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर 2-2 चम्मच दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। तुलसी के पत्तों के रस में कपूर मिला लें और इस रस में चंदन की लकड़ी को घिसकर सिर पर लेप करें। इससे सिर दर्द दूर होता है।


4. बुखार और जुकाम : तुलसी की 65 पत्ते और 8 कालीमिर्च को 250 मिलीलीटर पानी में अच्छी तरह पकाकर छान लें। फिर इसमें दूध व चीनी डालकर चाय की तरह पीएं। इससे बुखार ठीक होता है और जुकाम शांत होता है।                  जानिए किन- किन बिमारियों को जड़ से मिटाती है - नीम
5. गुहेरी (आंखों की पलकों पर फुंसियां होना) : आंखों की पलकों पर फुंसियां होने पर तुलसी के पत्ते के रस में लौंग घिसकर लगाएं। इससे फुंसियां समाप्त होती है। 

6. चेचक (बड़ी माता) : तुलसी के पत्तों के साथ अजवायन को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से चेचक का बुखार शांत होता है। नीम की नई पत्तियां व तुलसी के पत्ते को मिलाकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण शहद या मिश्री के साथ मिलाकर सुबह के समय रोगी को दें। इससे चेचक के दाने कम होते हैं और जलन शांत होती है। 

7. मियादी बुखार : तुलसी के 10 पत्ते तथा आधा से 1 ग्राम जावित्री को पीसकर शहद के साथ मिलाकर रोगी को चटाने से मियादी बुखार में आराम मिलता है। काली तुलसी, वन तुलसी और पोदीना बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा दिन में 3 बार 3 से 7 दिनों मियादी बुखार से पीड़ित रोगी को पिलाएं। इससे बुखार उतर जाता है और रोग में आराम मिलता है। 

8. कान का दर्द : तुलसी के पत्तों के रस को हल्का गर्म करके थोड़ा सा कपूर मिलाकर कान में 2-3 बूंद डालने से कान का दर्द समाप्त होता है। तुलसी के पत्ते और एरण्ड के ताजे मुलायम पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और फिर इसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर कान के पीछे लगाएं। इससे कान की सूजन दूर हो जाती है और गांठे ठीक होती है।

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9. दाद : तुलसी के पत्तों का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है। इसके उपयोग से खाज-खुजली, मुंहासे, काले धब्बे, झांई आदि त्वचा के रोग ठीक होते हैं। दाद से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का रस 12 मिलीलीटर की मात्रा में पीना चाहिए। 

10. दांतों का दर्द : तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च और कपूर को पीसकर दर्द वाले दांतों के बीच दबाकर रखने से दांतों का दर्द ठीक होता है। 

11. सर्दी-जुकाम : तुलसी के पत्तों का रस, अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3-4 बार सेवन करने से सर्दी, जुकाम व खांसी दूर होती है।

12. नकसीर (नाक से खून का आना) : तुलसी के पत्तों का रस निकालकर 3-4 बूंद नाक में टपकाने से कुछ दिनों में नाक से खून आना हो जाता है।

13. विषैले जन्तु का दंश : तुलसी के पत्ते को पीसकर थोड़ा सा नमक मिलाकर दंश वाले स्थान पर लेप करने से विष का असर समाप्त हो जाता है। 

14. नाक की दुर्गंध : तुलसी के पत्तों का रस नाक में डालने से नाक की दुर्गंध दूर होती है तथा नाक के कीड़े भी नष्ट होते हैं। 

15. मिर्गी : तुलसी के पत्ते को पीसकर मिर्गी से पीड़ित रोगी के पूरे शरीर पर मालिश करें। इसके उपयोग से मिर्गी के दौरे शांत होते हैं।

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