कोविड से जुड़ी रिसर्च के बारे में लिखने में भी पुरुष आगे, सिर्फ 34% महिलाओं को मिला मौका

कोरोना वायरस के असर से बीते कुछ महीनों के दौरान रिसर्च पेपर लिखने वाली महिलाओं की संख्या में भारी कमी आई है। एक स्टडी के मुताबिक सिर्फ एक तिहाई महिलाओं ने रिसर्च पेपर लिखे। यहां तक कि सीनियर मानीजाने वाली वुमनऑथरभी इस काम से दूर रहीं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा रिसर्च पेपर लिखने की कम दर यह सवाल पैदा करती है कि कोराेना वायरस के प्रति उनकी गंभीरता कहीं कम तो नहीं है? क्या इसका प्रभाव महिला और पुरुष दोनों पर अलग-अलग हुआ है?

कमी मानते हैं
रिसर्च पेपर के मुख्य लेखक अना केटेरिना पीहो गोम्स कहते हैंये चिंता की विषय है कि इस महामारी के बीच महिलाओं के रिसर्च पेपर की संख्या काफी कम है। रिसर्च प्रोफेशनल न्यूज में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के रिसर्चर महिलाओं की मौजूदगी के बिना रिसर्च पेपर लिखे जाने में निश्चित तौर से कमी मानते हैं।

पुरुषों का अध्ययन अधिक
बीएमजे ग्लोबल हेल्थ की रिसर्चर स्टडी के अनुसार इस साल जनवरी से अब तक कोविड-19 पर 1,445 पेपर्स पर रिसर्चर्स की स्टडी हुई। इनमें से सिर्फ 34% महिलाओं ने रिसर्च पेपर लिखे। इसकी वजह जानने के लिए पिन्हो गोम्स और उनकी टीम ने कुछ फैक्टर्स रखें। वे कहते हैं कोविड-19 एक ऐसा विषयहै जिसके बारेमें महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का अध्ययन अधिक है।

परिवार का बोझ बढ़ा है

इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान महिलाओं पर बच्चों, परिवार और घर का बोझ हर हाल में बढ़ा है। घर की तमाम जिम्मेदारी निभाते हुएमहिलाओं को रिसर्च पेपर लिखने का समय कममिला। रिसर्च की ये राय है कि इनकारणों ने महिलाओं की कार्यक्षमता को पूरी तरह प्रभावित किया है।

डाटा बेस हाई रहता है
साइंटिफिक कंवर्सेशन और रिसर्च के नजरिये से देखें तो महिलाओं के लिखे रिसर्च पेपर को यूनिक मानकर खास महत्व दिया जाता है। महिलाओं की उपस्थिति की वजह से रिसर्च का डाटा बेस हाई रहता है।कोविड-19 के संदर्भ में बात की जाए तो इसकी वजह से हुए सामाजिक और आर्थिक बदलावाें को जानने के लिए रिसर्च पेपर में महिलाओं की भारीदारी भी पुरुषों की तरह ही जरूरी है।

समाज को फायदा होगा

वैसे भी रिसर्च पेपर लिखने के लिए महिला रिसर्चर्स को अधिक प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। ये बात महामारी के दौरान जितनी जल्दी महिलाएं समझ लें, उतना अच्छा है। उनके योगदान का फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि पूरे समाज को हाेगा।



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Men lead in writing about research related to corona virus, only 34% women get chance


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