नाग पंचमी 2020: वास्तु के अनुसार इस दिशा में करें नाग देवता की पूजा, मिलेगा काल सर्प दोष से छुटकारा

  नाग पंचमी 2020:  वास्तु के अनुसार इस दिशा में करें नाग देवता की पूजा, मिलेगा काल सर्प दोष से छुटकारा   Image Source : INSTAGRAM/BHAKTISAROVAR

श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाने का विधान है | लिहाजा शनिवार को नागपंचमी है | आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार वास्तु के अनुसार सही दिशा में, सही क्रम में पूजा करके कालसर्प दोष से मुक्ति  पा सकते हैं। जानिए इसके बारे में विस्तार से।

जानिए कुंडली में कालसर्प दोष है या नहीं

आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार प्रत्येक जन्म पत्रिका में राहु से केतु सातवें खाने में होता है और काल सर्प दोष का मतलब है सारे ग्रहों का राहु और केतु के एक ही तरफ होना। अतः आपकी जन्मपत्रिका में ऐसी स्थिति बन रही है तो आपको आज के दिन नागपंचमी की पूजा जरूर करनी चाहिए, लेकिन यहां आपको एक और बात जरूर बता दें कि अगर आपकी पत्रिका में कालसर्प दोष नहीं है, तब भी आपको आज के दिन दिशाओं के क्रम में नागों की पूजा जरूर करनी चाहिए। क्योंकि राहु तो सभी की जन्मपत्रिका में होता है। अतः कालसर्प दोष हो या न हो, राहु कृत पीड़ा की शान्ति के लिये दिशाओं के सही क्रम में पूजा करना सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा। 

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राहु सर्प का मुख है और केतु सर्प की पूंछ है चूंकि पूजन मुख में करना उचित है। अतः आपको ये देखना है कि आपकी जन्म पत्रिका के किस खाने में राहु बैठा हुआ है और फिर उसी के अनुसार सही दिशा में नाग पंचमी की पूजा करनी है | फिलहाल राहु आपकी कुंडली के किस खाने में बैठा हुआ है।

अगर आपको भी इस तरह का कोई भय है या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है या आप राहू से पीड़ित हैं,  तो उससे छुटकारा पाने के लिये आज के दिन आपको इन आठ नागों की पूजा करनी चाहिए......  वासुकि .... तक्षक .... कालिय .... मणिभद्र ..... ऐरावत ..... धृतराष्ट्र .... कर्कोटक और धनंजय |

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आठ नागों के अनुसार करें इन दिशाओं में पूजा

आपको एक वर्ग बनाना हैं। इस वर्ग के अनुसार 

  • ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में वासुकि नाग की पूजा करनी चाहिए
  • पूर्व में तक्षक नाग की पूजा करनी चाहिए।
  • दक्षिण-पूर्व में कालिय नाग की पूजा करनी चाहिए।
  • दक्षिण में मणिभद्र नाग की पूजा करनी चाहिए।
  •  दक्षिण-पश्चिम में ऐरावत नाग की पूजा करनी चाहिए।
  •  पश्चिम में धृतराष्ट्र नाग की पूजा करनी चाहिए।
  •  उतर-पश्चिम में कर्कोटक नाग की पूजा करनी चाहिए।
  • उत्तर में धनंजय नामक नाग की पूजा करनी चाहिए।

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