बच्चों को बेवजह डांटने से बचें, नौनिहाल के साथ सब्र से पेश आकर जीत सकते हैं उनका दिल

बच्चों का कभी-कभार ज़िद करना, नखरे दिखाना और बात न मानना सामान्य है। पर जब वे यही सब अक्सर करने लगते हैं तो इस तरह के बर्ताव उनकी आदतों में शामिल हो जाते हैं। बच्चों का यह रवैया उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बहुत हानि पहुंचाता है।

अपनी बात मनवाने के लिए वे इस तरह के हथकंडे अपनाने लगते हैं कि माता-पिता को मजबूर होकर उनकी ज़िद पूरी करनी पड़ती है। बच्चों की इस आदत को कैसे बदलें और उनमें अच्छी आदतें कैसे विकसित करें, हर अभिभावक के लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है।

1. दिनचर्या का रखें ख़्याल

ये बात सामान्य लग सकती है, पर है काम की। इस समय जब बच्चों को स्कूल या ट्यूशन जाने का टेंशन नहीं है, तो ऐसे में कोशिश कीजिए कि आप इस दौरान रोज़ाना का रुटीन बनाए रखें। बच्चों के सोने, खाने, व्यायाम, पढ़ाई और खेलकूद के समय को समुचित ढंग से बांटें।

सही रुटीन बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखेगा।

2.अपना रवैया भी बदलें

बच्चे तो मासूम होते हैं। वे कई चीज़ें आपके बिना सिखाए आपके ही व्यवहार से सीख जाते हैं। अक्सर अभिभावकों की आदत होती है बच्चों को बेवजह डांट देना या कभी- कभी उन पर हाथ उठा देना। इस रवैये से बच्चों के अंदर ग़ुस्सा और चिड़चिड़ापन भर जाता है।

समय के साथ ये चिड़चिड़ापन ज़िद में तब्दील होने लगता है। इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों के साथ थोड़ा सब्र से पेश आएं।

3. खाने में विविधता लाएं

बच्चे सबसे ज़्यादा भोजन के मामले में नखरे दिखाते हैं। ऐसे में बच्चे को कम मात्रा में अलग-अलग भोजन परोसें और ग़ौर करें कि वह कौन-से व्यंजन अधिक पसंद कर रहा है। वह जो भी नापसंद करता है उसमें बदलाव करके, कुछ नए तरीक़े से पौष्टिक बनाकर दें।

पौष्टिक भोजन देना चाहती हैं तो रंगीन सब्ज़ियों का प्रयोग करें। रंग बच्चों को पसंद आते हैं। ये तरीक़ा उन्हें भाएगा और वे बिना नखरे के खाया करेंगे।

4. तारीफ़ करना न भूलें

बच्चों को समझाने के लिए पहले उन्हें समझना ज़रूरी है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी बात माने और आपका सम्मान करे, तो आपको उसके साथ एक मज़बूत बंधन बनाना होगा। सामान्य लहज़े में कही गई बात को बच्चे मानते हैं।

अगर वे सही काम करते हैं, तो कभी उनकी तारीफ भी करें। सही तरीक़े से की गई तारीफ़ बच्चों का मनोबल बढ़ाती है। हम अक्सर अपने लिए तारीफ चाहते हैं, लेकिन यही बात बच्चों के मामले में भूल जाते हैं। हर बार न सही, लेकिन कभी-कभी उनकी तारीफ ज़रूर करें।

5. तवज्जो की चाहत

बच्चे कई बार ध्यान पाने की चाह में भी बदमाशियां करते हैं। कभी-कभार तो उन्हें तवज्जो दें, लेकिन हमेशा नहीं। ख़्याल रखें कि वाक़ई उनकी हरकत पर ध्यान दिया जाना चाहिए या नहीं। बच्चे की हर ऐसी कोशिश पर ध्यान देंगे तो वे हमेशा ये तरीक़ा अपनाएंगे।

6. तुरंत प्रतिक्रिया न दें

ग़लतियां तो सबसे होती हैं, लेकिन बच्चे के विषय में हमें ध्यान रखना है कि यदि वह ग़लती करे तो तुरंत उस पर चिल्लाने या डांटने के बजाय धीरज से काम लें। कुछ वक़्त रुककर उसे बाद में प्यार से समझाएं कि उसने जो किया वह ग़लत था और उससे क्या-क्या नुकसान हो सकते थे। ऐसे में बच्चा आपकी बात सुनेगा भी और समझेगा भी।

7. फ़ोन से दूरी बनाएं

भले ही फ़ोन बेहद ज़रूरी हो गया है, लेकिन यदि हम बच्चों के सामने हरदम उस पर व्यस्त रहेंगे, तो वे भी फ़ोन के लिए ज़िद करेंगे और न देने की स्थिति में स्वाभाविक रूप नाराज़ होंगे और चिड़चिड़ाएंगे। इसलिए जब बच्चे आसपास हों या आप बच्चों के साथ समय बिता रहे हों तो मोबाइल दूर रखें।

इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी अहसास दिलाएं कि हमें फ़ोन पर बहुत अधिक निर्भर नहीं होना है। उम्र के अनुसार उन्हें तकनीकके फ़ायदे और नुक़सान भी बताएं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Avoid scolding children unnecessarily, they can win their hearts by being patient with Naunihal


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3eb8b6Q
via IFTTT

Post a comment

0 Comments