भारत की पहली कॉर्डियोलॉजिस्ट थीं डॉ. एस पद्मावती, 103 साल की उम्र में कोविड-19 की वजह से हुआ निधन

डॉ. एस पद्मावती 103 साल की उम्र में कोविड-19 के चलते इस दुनिया में नहीं रहीं। नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने 30 अगस्त को यह जानकारी दी। उनका पिछले 11 दिनों से नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज चल रहा था।

30 अगस्त को ही पंजाबी बाग स्थित कोविड-19 शवदाह गृह में उनकी अंत्येष्टि की गई। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, बेहद कम संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए मौजूद रहे।

उनका जन्‍म म्‍यांमार में हुआ था। उन्होंने रंगून मेडिकल कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद कार्डियोलॉजी में अपने करिअर की शुरुआत की। डॉ पद्मावती को भारत में पहली कार्डियक केयर यूनिट की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने 1981 में नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी।

पद्मावती को कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और बुखार भी था। निमोनिया का असर उनके दोनों लंग्स पर हुआ जिसकी वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट की वजह से वे चल बसीं।

पद्मावती के मेडिकल के क्षेत्र में सराहनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1967 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। उन्हें 1992 में भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

डॉ पद्मावती को हार्वर्ड मेडिकल इंटरनेशनल अवार्ड के अलावा डॉक्टर बीसी रॉय और कमला मेनन रिसर्च अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।



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Dr. S. Padmavati, India's first cordologist, died at the age of 103 due to Kovid-19


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