68 साल तक जरूरतमंदों की सेवा कर दुनिया को दिया इंसानियत का संदेश, नन के पारंपरिक परिधानों से अलग नीली बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनकर खुद को लोगों से जोड़ा

गरीबों की मसीहा बनकर लोगों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को एक अल्बेनियाई परिवार में उस्कुब, उस्मान साम्राज्य में हुआ था। वे रोमन कैथोलिक नन थीं। जनवरी 1929 में वे भारत आईं, और हमेशा के लिए यहीं की होकर रह गयीं।

1948 में उन्होंने भारतीय नागरिकता ली। उन्होंने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। मदर टेरेसा ने 68 साल तक गरीबों और लाचार वर्ग की सेवा कर दुनिया को मानवता की शिक्षा दी। उनकी स्थापित की हुई संस्था, मिशनरीज ऑफ चैरिटी दुनिया के 123 देशों में 4500 सिस्टर्स के जरिए लोगों की सेवा कर रही है। उनके जन्मदिन पर देखिए उनके सेवा भाव को दिखाती चंद तस्वीरें :

1950 में मदर टेरेसा ने कोलकाता का रुख किया। यहां आने से पहले वह ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया और युगोस्लाविया की नागरिक रह चुकी थीं।

भारत उनका पांचवां और सबसे पसंदीदा घर बना। उन्होंने नन के पारंपरिक परिधानों से इतर नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनकर खुद को लोगों से जोड़ा।

उन्होंने गरीबों के इलाज और गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए ‘निर्मल हृदय’और ‘निर्मला शिशु भवन’के नाम से आश्रम खोले।

मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, हालांकि मदर टेरेसा ने प्राइज मनी लेने से इंकार कर दिया और कहा कि इसे भारत के गरीब लोगों में दान कर दिया जाए।



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Served the needy for 68 years, conveying the message of humanity to the world, wearing a blue border white saree, different from the traditional costumes of the nuns, and attached themselves to the people.


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