औरतों के लिए संकट बना कोरोना काल, लाखों महिलाएं नहीं ले पाईं गर्भनिरोक दवाएं, अबॉर्शन कराना भी हुआ मुश्किल

हाल ही महिलाओं पर हुई रिसर्च के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन में लाखों महिलाओं और लड़कियों को गर्भनिरोधक दवाएं नहीं मिल पाईं। वहीं ऐसी महिलाओं की तादाद भी अधिक रहीं, जिन्हें अबॉर्शन की सुविधा नहीं मिली।

गौरतलब है कि मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल सारी दुनिया में अबॉर्शन और काॅन्ट्रासेप्टिव सर्विस उपलब्ध कराती है। उनका कहना है कि 19 लाख लड़कियों को इस महामारी के चलते गर्भनिरोधक दवाएं नहीं मिलीं। वहीं सुरक्षित तरीके से अबॉर्शन भी इनके लिए मुश्किल रहा।

अबॉर्शन प्रोवाइडर इस संस्था के अनुसार इस साल के शुरुआती कुछ महीनों में अनवांटेड प्रेग्नेंसी के लगभग 900,000 मामले सामने आए। इनमें से 15 लाख मामले असुरक्षित गर्भपात के थे, वहीं 3,100 प्रेग्नेंसी से संबंधित डेथ केस रहे।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार हर साल 5 से 12 % महिलाएं असुरक्षित गर्भपात की वजह से अपनी जान गवां देती हैं।

मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल ने अपनी रिसर्च में बताया कि भारत में लॉकडाउन के दौरान 13 लाख महिलाएं न चाहते हुए भी मां बनने को मजबूर हुईं। इनमें से 920,000 महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात की सुविधा मिली। साथ ही अबॉर्शन के बाद उनकी सही देखभाल भी की गई।

मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल ने कोरोना काल में महिलाओं और लड़कियों को गर्भनिरोधक दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी। वहीं अबॉर्शन को महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक बताया।

इस एनजीओ के अनुसार स्वास्थ्यकर्मियों ने लॉकडाउन के दौरान महिलाओं तक गर्भनिरोधक दवाएं पहुंचाने का काम बखूबी किया है। ऐसे लगभग 37 देश हैं जहां महिलाओं को सुरक्षित तरीके से अबॉर्शन की सुविधा भी दी गई है।

मैरी स्टॉप्स ने ब्रिटेन, साउथ अफ्रीका और भारत सहित हर देश में रहनी वाली 16 से 50 साल की 1000 महिलाओं पर सर्वे किया। ब्रिटेन की महिलाओं के अनुसार कोरोना काल से पहले जिन महिलाओं को 81% अबॉर्शन की सुविधा मिलती थी, वहीं इस महामारी में 21% ही मिली।

भारत में रहने वाली वे महिलाएं जिन्हें अबॉर्शन की जरूरत थी, उनका कहना है महामारी के दौरान हमारे क्षेत्र में यह सुविधा बंद थी। इन 10 में से एक महिला के अनुसार उन्हें अबॉर्शन कराने के लिए पांच हफ्ते तक इंतजार करना पड़ा।

मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल के मुताबिक ''महामारी के दौरान भी यह सुनश्चित करने की जरूरत है कि अबॉर्शन और कंट्रासेप्शन जैसी जरूरी सुविधा हर हाल में महिलाओं को मिले''।



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Corona period became a crisis for women, millions of women could not take contraceptive drugs, it was difficult to get abortion


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