भारत के युवा कलाकारों के साथ मिलकर ITC Vivel लैंगिक समानता दिवस पर 'वॉयस ऑफ आर्ट' को पेश किया

दुनियाभर में महिलाओं को समान सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक और रोजगार संबंधी अधिकार दिलाने के लिए 26 अगस्त को विश्व समानता दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद जेंडर के आधार पर सभी तरह की असमानताएं खत्म करने के साथ ही रिश्तों से लेकर घरेलू और नेतृत्व संबंधी सभी भूमिकाओं में महिलाओं को अवसरों की समानता उपलब्ध कराना है। इससे महिलाएं न सिर्फ अधिक रचनात्मक और मजबूत बनेंगी, बल्कि दुनिया के लिए भी तरक्की की नई राहें निकलेंगी।

बीते कई वर्षों से कला यानी आर्ट, बदलाव और अपनी बात को समाज के सामने रखने का एक अच्छा माध्यम बनी हुई है। पूरे मानव इतिहास में कला हमेशा संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को क्रॉनिकल करने, असमानताओं और अन्याय के खिलाफ प्रतिक्रिया करने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। देश, समाज और परिवार के निर्माण में महिलाओं के बेहद अहम योगदानों को देखते हुए ITC Vivel ने भी एक शानदार पहल की है। उसने लैंगिक समानता दिवस के इस अवसर पर ‘Voice of Art’ पेश किया है। इसके तहत कला के जरिए समानता का संदेश देने की नायाब कोशिश की गई है। बड़ी संख्या में देशभर के युवा कलाकारों ने कला के जरिए समानता का संदेश देते हुए नए जमाने के मुताबिक इसकी नई व्याख्या सामने रखी है।

वॉयस ऑफ द Vivel वुमेन

‘अब समझौता नहीं‘ फिलॉसफी के साथ आईटीसी विवेल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। Vivel 'V' का अर्थ है वॉयस ऑफ द Vivel वुमेन, जो लिंग-आधारित रूढ़ियों को खत्म करने और महिलाओं के साथ समान व्यवहार के लिए प्रोत्साहित करती है। Vivel का दृढ़ विश्वास है कि किसी को भी अपनी गरिमा से समझौता नहीं करना चाहिए या उसके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

वैसे भी कला अभिव्यक्ति का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। खासकर, अगर असमानताओं और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की बात हो तो, कला के विभिन्न रूपों का कोई सानी नहीं है। इसे देखते हुए ITC Vivel ने एक खूबसूरत फिलॉसफी सामने रखी है- ‘अब समझौता नहीं’। महिलाओं को ‘अब समझौता नहीं’ कहने के लिए प्रेरित किया गया है। संभव है कि Vivel’s Voice of Art से पहले से बह रही समानता की बयार को और गति मिलेगी।

400 से ज्यादा कलाकारों ने लिया भाग

Vivel ने देशभर के युवा कलाकारों के लिए एक यूनीक प्लेटफॉर्म सामने रखा है। देशभर से 400 से अधिक कलाकारों ने इसके लिए एंट्री कराई है, ताकि वे कला के जरिए समान और प्रगतिशील समाज का साफ संदेश दे सकें। कला के जरिए समानता के संदेश देने का मकसद बेहतर समाज के निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करना भी है। ITC लिमिटेड के पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बिज़नेस के डिविज़नल चीफ एग्जीक्यूटिव समीर सत्पथी ने इन तैयारियों के बीच कहा कि समानता एक बुनियादी अधिकार है, लेकिन कभी-कभी लोगों द्वारा इसका उल्लंघन किया जाता है।

आईटीसी लिमिटेड के पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बिजनेस के डिविजनल चीफ एक्जीक्यूटिव समीर सत्पथी ने कहा, ''समानता एक मौलिक अधिकार है, जिसका कई बार व्यक्तियों द्वारा उल्लंघन किया गया है। अब समझौता नहीं’ के साथ विवेल सक्रिय रूप से समानता का समर्थन करता है और वॉयस ऑफ आर्ट के साथ युवा लोगों के एक समूह को अपनी स्वतंत्र आवाज़ व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।



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ITC Vivel in association with young artists of India to present 'Voice of Art' on Gender Equality Day


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