Top 10 moral stories in hindi | hindi kahaniyan

Moral storieas (मोरल स्टोरीज़) – नमस्कार दोस्तों ! स्वागत है आपका ज्ञान से भरी शिक्षाप्रद कहानियों (moral stories) की इस दुनिया मे.

 

दोस्तों moral stories  हर इंसान के जीवन मे बहुत महत्व रखती है. यहां पर बताई जाने वाली हर moral stories मे आपको एक बहुत  जरुरी ज्ञान जरूर सीखने को मिलेगा. जो आपके जीवन कहीं ना कहीं बहुत काम आएंगे. 

 

तो आज मैं कहानियों की दुनिया से आप लोगो के लिए  10 सबसे अच्छी (top 10 moral stories in hindi) शिक्षाप्रद कहानियाँ लेकर आया हूं. 

 

इन moral stories से आपको जीवन के अनमोल ज्ञान सीखने को मिलेंगे. तो चलिए शुरू करते है. 

 

Video देखो 🎥👉🎧

 

 

 

 

शंकर और फकीर – moral stories in hindi 

 

एक फ़क़ीर शहर की तरफ जा रहा था, फ़क़ीर बहुत देर से चल रहा था, वो थक चुका था और हल्की हल्की रात भी हो चुकी थी.

 

 

शहर अभी काफ़ी दूर था.. फकीर एक घर के पास आकर रुक गया.

वो जिसका घर था उसका नाम था. *शंकर*

 

 

शंकर एक नेक दिल का इंसान था और बहुत ही सुलझा हुआ व्यक्ति था.

 

शंकर ने फकीर को देखा तो वो फकीर घर मे लें आया. और खूब सेवा की. फकीर बहुत खुश हुआ. और आशीर्वाद देते हुए बोला खुश रहो बच्चा.

 

शंकर बोला, आप यही विश्राम कर लीजिये.

 

सुबह होते ही शंकर ने उन्हें कुछ अनाज और फल देकर बिदा किया.

 

इधर फकीर शंकर की सेवा से बहुत खुश था. और उसे दुआएं देना लगा, “भगवान करें तुम्हे और बरकत मिले और ईश्वर तुम्हे सदा ख़ुश रखे.”

 

 

फकीर की पहली बात को सुनकर शंकर हसने लगा और बोला, अरे फकीर अभी मेरे पास जो भी है ये भी नहीं रहने वाला.

 

शकंर की ये बात सुन फकीर शंकर की तरफ देखता रह गया और मन ही मन सोचने कगा की ये ऐसा क्यों बोल रहा..

 

 

इतना सोचते हुए फकीर ने कहा मैं शहर से लौटते वक़्त एक बार तुमसे मिल कर जरूर जाऊंगा. इतना कह कर फकीर वहाँ से चला गया.

 

 

ठीक एक साल बाद, ज़ब फकीर वहाँ दोबारा आया तो देखा की उसका सारा धन, उसकी सारी संपत्ति सच्च मुच खत्म हो चुकी है.

 

 

ज़ब फकीर को पता चला की अब शंकर नगर से बाहर एक गांव मे एक बड़े जमींदार के घर नौकर का काम कर रहा है.

 

 

शंकर अपना अलग से एक छोटी सी झोपड़ी बना कर हसि ख़ुशी गुजारा कर रहा है. और दो वक़्त की रोटी मिल जाती है और खुश है.

 

फकीर बिना देरी किये तुरंत शंकर के पास पंहुचा,

शंकर ने फिर से फकीर की सेवा मे अपनी तरफ से कोई कमी ना रखी,

 

खाने को जो भी रुखा सुखा था वो हस्ते हुए फकीर को दे दिया.

 

अबकी बार दूसरे दिन ज़ब फकीर जाने लगा तो इस बार फकीर की आँखो मे आंसू थे.

 

“फकीर कहने लगा हे भगवान ये तूने क्या किया?”

इधर शंकर फिर हंसा और कहने लगा. अरे फकीर तू क्यों दुःखी हो रहा है.

 

 

“ईश्वर हमारे लिए जो भी करते है वो सही करते है. उनका कुछ ना कुछ सन्देश या सीख छुपी होती है. जिसे हम नहीं समझ पाते और उल्टा ईश्वर को कोसने लगते है..”

 

 

बाक़ी हमारे कर्म होते है. हमें तो ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए.

और हा समय हमेशा एक सा नहीं रहता.और सुनो फकीर.. मेरा ये समय भी नहीं रहने वाला.

 

इधर फकीर सोचने लगा मैं तो केवल भेष से फकीर हूं लेकिन सच्चा फकीर तो तू है.

 

 

फकीर कुछ दिन की यात्रा के बाद ज़ब फिर से वापिस लोटा तो उसने जो देखा उसे अपनी आँखो पर विश्वास नहीं हो रहा था.

 

 

शंकर जमीदारो का भी जमींदार बन चुका था. पता करने पर फकीर को ये जनजारी मिली की जिस जमींदार के यहां शंकर नौकरी करता था उसकी कोई संतान नहीं थी.

 

वो अकेला रहता था. तो उस जमींदार ने मरते वक़्त ये सारी संपत्ति शंकर के नाम कर दी.
शंकर के इन दिनों को देखकर फकीर अब बहुत खुश हुआ.

 

फकीर शंकर के पास गया और बोला तेरी इस बरकत को ईश्वर सदैंव बनाए रखे.

 

 

फकीर की ये बात सुन शंकर फिर से हसने लगा. और बोला, “फकीर ! अभि भी तेरी नादानी बनी ही हुई है.

ये सुन फकीर फिर से हैरान हुआ और पूछा. “क्या ये भी नहीं रहने वाला” 😳

 

 

शंकर बोला, हां ! क्योंकि समय का पहिया एक बार फिर घूमेगा

 

 

तब ! या ये सम्पति नहीं रहेगी या तो फिर इस सम्पति को मानने वाला और उसका आनंद लेने वाला नहीं रहेगा.

 

इस संसार मे कभी भी कुछ भी हमेशा एक सा नहीं रहता, बदलाव ही ! प्रकृति का नियम.

 

यदि कुछ शाश्वत, अमर और हमेशा रहने वाला है तो वो है हमारी आत्मा और मन का सुकून

 

शंकर की बातें सुन फकीर का मन सुकून से भर गया. आनंद मे हो गया और फकीर वहाँ से चला गया.

 

इधर एक बार फिर से समय का पहिया घूमा.. फकीर बड़े लम्बे समय बाद अपनी सफ़ेद दाढ़ी लिए ज़ब वहाँ से गुजर रहा था…

 

 

तो देखा की. शंकर का वो महल तो है ! पर शंकर नहीं है…

 

.क्योंकि शंकर ! अब इस दुनिया से जा चूजा था. महल वीरान हो चुका था.

 

महल मे मकड़ियों का जाला बिछ चुका था. कबूतर गुटरगूँ कर रहे थे. परिंदो के पँख फरफराने की आवाज़े पूरे महल मे गूँज रही थी.

 

 

ये सब देख फकीर के मन से मे एक आवाज़ गूँजी.

*कह रहा है आसमा. ये समा कुछ भी नहीं.. रो रही है शब्नमे, नौरंगे जहाँ मे “कुछ नहीं.”*

*जिनके महल मे हज़ारो रंग के जलते थे फ़ानूज. अब झाड़ है उनके “कब्र पर, बाक़ी निशां कुछ, भी नहीं.*

 

चलिए जानते है इस moral story से क्या शिक्षा मिलती है.? 

 

अब वो फकीर मन ही मन सोचने लगा की इंसान जिंदगी भर कितना दौड़ता रहता है.

किसी ना किसी बात को लेकर परेशान रहता रहता है.

जिन चीजों के लिए इंसान हमेशा तड़पता रहता है,

 

जिन चीजों के पीछे इंसान हमेशा भागता रहता है. फिर चाहे वो, धन हो, शोहरत हो, सम्मान हो, कोई वस्तु हो या फिर प्यार हो.

 

ये चीजे ना मिले ! तो दुःखी.
मिल जाए फिर भी दुःखी..
और मिल कर अगर खो जाए या खत्म हो जाए. फिर भी दुःखी.

 

 

जबकि ज्यादातर लोग ये बात जानते हुए भी, की ये सब हमेशा के लिए नहीं रहना वाला..

 

ये सब चीजे एक दिन बदल जाएंगी या खत्म हो जाएंगी.

 

यही वजह है की इसी भाग दौड़ मे, इंसान खुद का सुकून खो देता है.

 

मन ही मन फकीर कहता है. की ये ज्ञान भरी बात शंकर जानता था.

 

वो बहुत ही सुलझा हुआ इंसान था. यही वजह है की उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था ज़ब उसकी life मे उतार चढ़ाव आते थे.

 

वो हमेशा खुश रहता था. और जिंदगी को सुकून भरे मन से खुल कर जीता था.

 

क्योंकि ये जिंदगी भी तो एक दिन खत्म ही होनी है.

 

Moral of, this stories..

इसलिए दोस्तों हमेशा याद रखो… जीवन मे ज़ब भी आप बुरे दौर से गुजर रहे हों.

 

तमाम मुश्किलों से घिरे हो. तो दुःखी ना हो और चिंता ना करें.

 

क्योंकि दुःखी रह कर या चिंता करने से, आपकी समस्याए खत्म नहीं होंगी बल्कि और बढ़ जाएंगी.

 

इसलिए बुरे वक़्त मे ईश्वर को दिल से याद करो प्रार्थना करो. समस्या को खत्म करने पर शांत मन से विचार करो.

 

 

और एक बात हमेशा याद रखना वक़्त और परिस्थितियां हमेशा एक सी नहीं रहती, बदलती रहती है.

 

 

आज बुरा वक़्त है तो कल को अच्छा वक़्त भी आएगा..

 

ज़ब अच्छे दिन अधिक समय तक नहीं रहते तो बुरे दिन भी बीत जाएंगे.

 

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

चांदी का थैला और चार शब्दों की प्रार्थना | great moral story in hindi 

 

Moral-story
Picture

 

एक व्यक्ति मृत्यु के बहुत करीब था.वो मरने वाला था.

उसने अपने बेटे को चांदी से भरा हुआ एक थैला दिया.

 

और उसने अपने पुत्र को बताया ज़ब भी इस थैले से चांदी के सिक्के खत्म हो जाए.

 

तो 4 शब्दों की एक प्रार्थना को दिल से बोलना. ये थैला चांदी के सिक्कों से फिर भर जाएगा.

 

पिता ने बेटे के कान मे वो वो 4 शब्दों की प्रार्थना बोल दी. बोलते ही पिता मर गया.

 

इधर बेटा पिता के मरने से कुछ दिन बहुत दुःखी रहा लेकिन चांदी से भरे थैले को देख कर हमेशा खुश होता रहता.

 

अब बेटा, उन चांदी के सिक्कों को एक एक कर के रोज अपनी जरूरतों को और शौक को पूरा करने के लिए थोड़ा थोड़ा खर्च करता रहता.

 

 

थैला इतना बड़ा था की उसे उन सिक्कों को खर्च करने मे कई साल बीत गए.

 

लेकिन इस बीच वो 4 शब्दों की प्रार्थना ही भूल गया.

 

 

ज़ब थैला खत्म होने को आया तो वह उसे याद आया की, “अरे वो चार शब्दों की प्रार्थना क्या थीं, जो पिता ने मेरे कानो मे बताई थीं.

 

उसने बहुत कोशिश की लेकिन उसे याद ही नहीं आया.

 

अब वो लोगो से पूछने लगा

, पहले परोसी से पूछा की क्या ” कोई ऐसी प्रार्थना जानते हो जिसमे 4 शब्द है.

 

पड़ोसी ने kaha! हाँ, एक 4 शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है. “ईश्वर मेरी मदद करो”

 

ये सुन उसे लगा की नहीं ! ये वो शब्द नहीं है.

उसने बहुत सारे 4 शब्दों वाली प्रार्थनाओ को बार बार दोहरा कर देखा..

 

लेकिन उस खाली थैले मे सिक्के बढ़े ही नहीं.

वो मन ही मन बहुत दुःखी हो गया.

 

फिर वो एक ब्राम्हण के पास गया. ब्राम्हण ने भी उसे एक 4 शब्दों की प्रार्थना बताई.. ब्राम्हण ने बोला की “ईश्वर तुम महान हो “

 

 

लेकिन इस प्रार्थना से भी कुछ नहीं हुआ.

 

फिर उसे एक धनी इंसान मिला, उसने कहा की तुम ये प्रार्थना करो. “ईश्वर मुझे धन दो “

 

लेकिन इस प्रार्थना से भी कुछ नहीं हुआ.

 

अब वो उदास हो कर अपने घर लौट गया. इतने मे वहाँ एक भिखारी आया.

 

भिखारी बोला की मे सुबह से कुछ नहीं खाया.. कुछ खिला दो मालिक. मालिक तुम्हे खूब बरकत देखा सुखी रखेगा.

 

 

भिखारी की बातें सुन उस लड़के ने तुरंत बचा हुआ खाना उस भिखारी को दे दिया.

 

उस भिखारी ने खाना खा कर ईश्वर से प्रार्थना की.

*“हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद”*

 

भिखारी के मु से निकली 4 शब्दों की इस प्रार्थना को सुन अचानक लड़का चौक पड़ा.

 

और चिल्लाने लगा. “अरे यहीं तो वो 4 शब्द थे.

 

बस फिर क्या था लड़के ने प्रार्थना के वो 4 शब्द दोहराने शुरू कर दिये.. देखते ही देखते थैला चांदी के सिक्कों से भर गया.

 

 

चलिए जानते है इस moral stories से क्या सीख मिलती है.

 

तो दोस्तों ये कहानी भी हमारी जिंदगी से ही जुड़ी है.

अब मान लो चांदी का वो थैला हमारी जिंदगी है और वो चांदी के सिक्के खुशियाँ है.

 

ज़ब तक हम अपनी जिंदगी मे शिकायत करते रहते है, परेशान होते रहते है.

 

तब तक हमारी जिंदगी के थैले मे मे वो खुशियों के सिक्के आते ही नहीं.

 

लेकिन ज़ब हम सारी शिकायते भूल कर ईश्वर को दिल से याद करते है प्रार्थना करते हुए परमात्मा को दिल से धन्यवाद देते है.

 

 

तो हमारी जिंदगी मे खुशियों के सिक्के भरने लगते है.

 

याद रखना जो इंसान हमेशा शिकायतों से भरा रहता है. वो कभी खुश नहीं रह सकता.

 

और जो इंसान, जिसके पास जो है उतने से ही संतुष्ट है !

 

तो वो किसी भी हालात मे ईश्वर को धन्यवाद करता रहेगा.

 

ऐसे इंसान आपको हमेशा खुश दिखाई देंगे.

क्योंकि ऐसे लोग कभी किसी से शिकायत नहीं करते. ऐसे इंसानों की जिंदगी आपको हमेशा एक शांती और सुकून से भरी दिखाई देगा.

 

 

 

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं इन दोनों कहानियों से आप बहुत कुछ सीखे होंगे.

 

 

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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दोस्तों यदि आप इन moral stories की  videos 🎥 देखना चाहते हो यहां पर click करें. 

 

.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

चिड़िया का घोषला | moral with story in hindi 

 

Moral story

एक चिड़िया ने एक खेत मे अपना घोंसला बना कर उसमे अंडे दिये. उसमे समय आने पर दो बच्चे निकले.

 

चिड़िया बच्चो की भूख मिटाने के लिए दाना चुगने के लिए रोज गांव की तरफ जाती.
और इस वहाँ पर चिड़िया के बच्चे अकेले ही रहते थे.

 

Chiriya ki kahani

इधर चिड़िया ज़ब लौट कर आती तो बच्चे बहुत खुश होते. चिड़िया अपने बच्चो की भूख मिटाती.

 

एक दिन चिड़िया देखा बच्चे बहुत डरे हुए है. बच्चो ने बताया की आज खेत का मालिक आया था.

 

उसने कहा फसल पक चुकी है कल बेटों से फसल की कटाई के लिए कहेगा.

 

इस तरह तो हमारा घोंसला तो टूट जाएगा फिर हम कहाँ जाएंगे.

 

 

चिड़िया माँ बोली, फ़िक्र मत करो. अभी खेत नहीं कटेगा, और अगले दिन सच्च मे कुछ नहीं हुआ. बच्चे बेफिक्र हो गए.

 

 

कुछ दिन बाद चिड़िया को अपने बच्चे फिर से डरे हुए मिले, बच्चे बोलने लगे की माँ वो किसान फिर आया था..

 

और कह रहा था की कल नौकरो को कह कर खेत को कटवाएगा.

 

इस बार चिड़िया की माँ फिर से बोली की फ़िक्र मत करो बच्चों. कुछ नहीं होगा.

 

 

कुछ दिन बाद चिड़िया के बच्चे फिर से डरे हुए मिले..

 

बच्चो ने बताया की आज किसान फिर आया था और वो बोल रहा था की फसल कटाई मे बहुत देर हो गई है कल वो खुद आकर फसल को काटेगा.

 

 

इस बार ये सुन कर चिड़िया बच्चो से बोली, अब खेत कल पक्का कट जाएगा.

 

इस बार चिड़िया अपने बच्चो को लेकर तुरंत एक सुरक्षित स्थान पर चली गई.

 

चलिए जानते है इस moral stories से क्या सीख मिलती है

 

बच्चे बहुत हैरान थे. और अपनी माँ से पूछने लगे की तुम्हे कैसे पता की इस बार फसल जरूर कट जाएगी..

 

 

माँ बोली. ज़ब तक कोई इंसान किसी काम के लिए दूसरों पर निर्भर होता है तो उसके काम को संपन्न होने मे हमेशा संदेह बना रहता है.

 

 

लेकिन ज़ब कोई इंसान अपने काम को खुद करने की ठान लेता है. तो वो काम जरूर होता है.

 

 

तो दोस्तों ये कहानी भी हमें शिक्षा देती है की ज़ब तक हम दूसरों पर डिपेंड रहते है.

 

दूसरों के भरोसे चलते रहते है. तब तक कोई भी काम ढंग से या समय से नहीं होता.

 

 

लेकिन जिस दिन हम अपने सारे काम अपने हाथ मे लें लेते है. अपने हर काम मे हम खुद जुड़ जाते है. तो हमारे वो सारे काम जरूर पूरे होते है.

 

 

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

ऐसी ही ज्ञान से भरी और भी moral stories पढ़ने लिए नीचे page नंबर 2 पर click करो… 

 

 

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