क्रिएटिव वर्क पर ध्यान दें ताकि आप कुछ नया कर सकें, खाली बैठने के बजाय व्यस्त रहकर खुश रहें और दूसरों में खुशियां बांटें

कोरोना का ये समय ऐसा है कि आमतौर पर न घर में सुकून है और न ही घर के बाहर। घर पर ज़्यादा समय गुज़ारो, तो बंदिश महसूस होने लगती है और घर से बाहर निकलो, तो लगातार मास्क पहनना पड़ता है। ऐसे में लगता है कि अच्छा है घर पर ही बैठा जाए। लेकिन घर पर रहकर भी कोई कितना टीवी देखेगा और सोएगा! समय इतनी आसानी से नहीं कटता।

जब कहीं भी संतुष्टि न मिले, तो चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक है। यही चिड़चिड़ापन हमारे मन-मस्तिष्क पर असर कर रहा है। किसी काम में मन नहीं लग रहा है। जिन कामों में दिलचस्पी है भी, उन्हें करने की इच्छा नहीं हो रही। काम बहुत हैं, लेकिन उन्हें करने के लिए मन नहीं बना पा रहे। चिंता मत कीजिए, इस स्थिति में सिर्फ़ आप ही नहीं हैं। ये परिस्थितियां कमोबेश हर किसी की हैं।

हम हालात तो तुरंत नहीं बदल सकते, किंतु अच्छी बात है कि ख़ुद को इसी क्षण से बदलना शुरू कर सकते हैं। यहां दिए गए सुझावों पर ग़ौर कीजिए, इन्हें अपनाने की कोशिश कीजिए, तो आप बेहतर महसूस करेंगे और कामकाज भी अच्छे ढंग से कर पाएंगे।

1 फोकस निश्चित पर रखें

सभी के मन में सबसे बड़ा सवाल है : स्थिति सामान्य कब होगी? अभी इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है। यही अनिश्चितता ज़्यादा परेशान कर रही है। ऐसे समय में समझदारी इसी में है कि जो निश्चित है, जो हमारे हाथ में है उस पर फोकस किया जाए। संक्रमण का ख़तरा ख़त्म नहीं किया जा सकता, लेकिन मास्क और अन्य उपाय अपनाकर अपनी अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

इसलिए, मास्क को लेकर खीझते रहने के बजाय उसकी अनिवार्यता को स्वीकार कर लें। इससे मन में ज़बरदस्ती कुछ करने का भाव घटेगा और चिड़चिड़ाहट कम होगी। कोरोना के चलते आप क्या नहीं कर पा रहे हैं, इसकी जगह सोचें कि आप क्या-क्या कर सकते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें घर पर समय बिताना अच्छा लग रहा है। घरबंदी के कारण वे परिवार के साथ समय बिता पा रहे हैं, ये उनकी सकारात्मक सोच को दर्शाता है।

2 क्रिएटिव वर्क पर ज़ोर दें

किसी भी परिस्थिति में न तो इंसान का जीवन रुकता है, न उसकी ख़ुशियां। अपने आसपास ही देख लीजिए, लोगों ने मास्क के रंग-रूप को लेकर ही कितने प्रयोग कर डाले। जिन्हें अपना पुराना काम करने में दिक़्क़त हो रही थी, उन्होंने उसी काम को करने के नए तरीक़े तलाश लिए या फिर कोई नया काम शुरू कर दिया। इस तरह हालात को अपने हिसाब से मोड़कर उन्होंने तरक़्क़ी की गाड़ी थमने नहीं दी।

रचनात्मकता ही ख़ुशियों का मूल मंत्र है। हमेशा ध्यान रखें आपका दिमाग़ एक साथ रचनात्मक और नकारात्मक नहीं हो सकता। रचनात्मकता यानी उम्मीद, समाधान की कोशिश और सकारात्मकता। जब हम रचनात्मक ढंग से सोचते हैं, तो कोई न कोई राह दिख जाती है। एक तत्काल फ़ायदा यह होता है कि मन की निराशा और नकारात्मकता छंटने लगती है।

3 ख़ाली न बैठें, व्यस्त रहें

ख़ाली दिमाग़ शैतान का घर! जितनी फ़ुर्सत में रहेंगे, दिमाग़ पर उतने ही ज़्यादा उल्टे-सीधे ख़्याल आएंगे। अगर कुछ न कुछ करते रहेंगे, तो दिमाग़ व्यस्त रहेगा और कुछ करने की संतुष्टि भी मिलेगी। कितने बजे व्यायाम करना है, कब नाश्ता करना आदि विवरणों के साथ पूरी दिनचर्या तैयार करें और उसका कड़ाई से पालन करें। अगर कामकाजी हैं, तो दफ्तर के काम के बाद भी ख़ाली न बैठें। गृहिणी हैं, तो काम के बाद बचा हुआ समय कुछ नया सीखने में लगाएं।

इसके लिए सिलाई, बेकिंग, क्रिएटिव राइटिंग, योग, क्राफ्ट जैसे ऑनलाइन कोर्स कर सकती हैं। ये आपको पूरी तरह से व्यस्त रखने में मदद करेंगे। जब हमारे पास हर चीज़ को करने का एक समय निश्चित रहेगा, तो ऊब नहीं होगी और न ही चिड़चिड़ापन महसूस करेंगे। सार्थकता का एहसास भी होगा।

4 आसपास ख़ुशी तलाश लें

ख़ुशी तलाशनी पड़ती है। जीवन में ऐसे लोगों या चीज़ों को शामिल करें जिनसे ख़ुशी मिलती है। सोशल मीडिया पर आपके किसी काम को तारीफ़ मिलने से मुस्कान चेहरे पर आ जाती है, तो ये भी तो एक ख़ुशी है। जब ख़ुश रहेंगे, तो आप घर में हैं या घर से बाहर, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। इसके अलावा ख़ुश रहने के लिए कुछ समय खुली हवा और हरियाली के बीच बिताएं। जगह ऐसी चुनें जहां संक्रमण का ख़तरा न हो।

हरियाली के लिए घर का बग़ीचा भी काम करेगा। अगर पशुओं के साथ समय बिताना पसंद है, तो थोड़ा समय इसके लिए निकालें। पालतू पशुओं के साथ खेलने से तनाव और चिंता दूर होती है। इससे मनोदशा में सुधार होता है और ख़ुशी तथा वेल बीइंग के एहसास को बढ़ावा मिलता है।



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