Hindi love story | best hindi kahani

Hindi love story – दोस्तों आज की इस कहानी से आपको जीवन की बहुत जरुरी बात सीखने को मिलेगी. 

ये hindi love story समाज और युवा पीढ़ी की जीवन तस्वीर को दिखाता है. 

 

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Hindi love story

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ये कहानी सुनीता नाम की लड़की की है जो किसी लड़के से प्यार करती थीं लेकिन लड़की की शादी उसके घर वाले किसी और लड़के से कर देते है.

 

तो चलिए जानते है उस शादी के बाद सुनीता की जिंदगी मे क्या हुआ.

 

एक बहुत बड़ी बहस – मान मनौवल और लाख समझाने बाद ज़ब लड़की की शादी उसकी इच्छा के बिना एक रमेश नाम के लड़के के साथ कर दी गई तो सुनीता निराश मन लिए एक बहु और पत्नी के रूप मे लड़के के घर आगई थीं.

 

तभी सुहागरात के वक़्त लड़का दूध लेकर कमरे मे आता है. और सुनीता के पास बैठ जाता है.

 

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तभी उसकी पत्नी आँख नीचे किये गुस्से मे पति से कहती है, क्या तुम मुझे अकेला छोड़ सकते हो.

 

सुनीता की ये बात सुन कर रमेश बहुत उदास होता है.

कुछ देर बाद रमेश मुस्करा कर बोलता है, अच्छा ठीक है तुम आराम करो, मे तो तुम्हारे लिए दूध लें कर आया था.

इतना कह कर रमेश कमरे से बाहर चला जाता है.

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इधर सुनीता अचरज मन से मन मार कर ही रह जाती है, की इसने झगड़ा क्यों नई किआ.

 

क्योंकि वो चाहती थीं की झगड़ा हो और कलेस हो ताकी वो उस गवार (रमेश) से तलाख लें सकें.

समय बीतता गया सुनीता को ससुराल मे रहते 5 दिन बीत गए.

सुनीता अपना हर समय अपने कमरे मे ही रहती किसी से बात नहीं करती.

 

 

रूम का दरवाज़ा बंद कर के वो बस मोबाइल मे सारा दिन अपने बॉयफ्रेंड से बात किया करती.

 

बॉयफ्रेंड उधर से सुनीता को दिमाग़ देता रहता ताकी वो ससुराल मे खूब कलेस करे और अपने पति से तलाख लें लें.

 

और उधर लड़के की माँ बिना शिकायत करे दिन भर घर का सारा काम करती थी.

 

माँ सब के लिए खाना भी खुद ही बनाती थीं फिर भी फिर भी माँ के चेहरे पर मुसकान ही रहती थीं.

रमेश एक छोटी सि कम्पनी मे काम करता था, रमेश, दिल का सच्चा, ईमानदार, मेहनती और एक अच्छा इंसान था.

 

रोज सुबह अपने काम पर जाता और शाम को थका हारा घर लौटता.

इस बीच उसकी पत्नी सुनीता उसे एक गिलास पानी भज नहीं पूछती थीं.

 

अब तक रमेश और सुनीता की शादी को लगभग एक महीना हो गया था मगर वो दोनों अब तक एक साथ कभी नहीं सोए थे.

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रमेश बहुत शांत स्वाभाव का था इसलिए वो सुनीता को कुछ नहीं कहता था.

 

रमेश सुनीता की तमाम हरकतों को नज़रअंदाज़ कर उसे खुद खाना परोस कर देता था.

 

सुनीता – रमेश और सास के साथ बैठकर कभी भी खाना नहीं खाती थीं.

सुनीता अपना खाना अपने कमरे मे अलग बैठ कर खाती थी.

सुनीता के पास ससुराल मे एक स्कूटरी भी थी जो की उसके पिता ने उसको दी थीं.

रमेश अब जैसे ही ऑफिस चला जाता. इधर सुनीता रमेश के जाने के बाद स्कूटरी लें कर अपने बॉयफ्रेंड के पास चली जाती मिलने के लिए.

रमेश के आने से पहले ही वो अपने ससुराल वापिस आजाती थीं.

 

एक दिन रमेश के ऑफिस की छुट्टी थी. और वह घर पर ही था.

इस बात का फायदा उठा कर सुनीता ने घर मे कलेस करने की सोची.

और माँ के द्वारा बनाए गए खाने की बुराई करती हुई माँ को उल्टा सीधा बोला.

 

ये सब देख रमेश को बहुत गुस्सा आता है. और गुस्से मे आकर रमेश सुनीता और हाथ उठा देता है .

यह सब देख रमेश की माँ उल्टा रमेश को ही चिल्लाने और डाटने लगती..

इधर सुनीता को तो बस एक झगड़े का बहाना ही चाहिए था. जो की उसे अब मिल गया था.

 

तभी सुनीता गुस्से मे बिना बोले स्कूटरी लें कर अपने बॉयफ्रेंड से मिलने चली जाती है.

 

और अपने बॉयफ्रेंड जे पास जाकर कहती है. की अब एक पल भी मुझे उस घर मे नहीं रहना. मे अब उन लोगो के बीच नहीं रहना चाहती.

 

मेरा दम घुटता है वहाँ. और आज तो उस ग्वार ने मुझ पर हाथ उठा जर अच्छा नहीं किया.

 

तभी उसका बॉयफ्रेंड सुनीता के इन हालातों का फायदा उठा कर अपनी चालक बुद्धि से बोलता है की मैं तो तुम्हे कब से कह रहा हूं की तुम भाग चलो मेरे साथ.

 

कहीं दूर,
मगर तुम हो की आज कल आज कल मे ही लगी रहती हो.

तब सुनीता कहती है की शादी के दिन मैं तुम्हारे पास ही तो तो आई थीं तब तुमने ही तो यह कह कर वापिस लौटा दिया था की खाली हाथ हम दोनों कहा तक भागेंगे.

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लड़का बोला – हा तो क्या कहता मैं.

मैंने तुमसे कहा था की कुछ पैसे और गहने साथ लें कर आना. और तुम हो की खाली हाथ मेरे पास आगई थी.

आखिर दूर एक नई जगह परजिं दगी की एक नई शुरुआत करने के लिए. पैसे तो चाहिए ना.

और हा ज़ब भी मैं तुम्हारे पास आता हूं और तुम्हे चुना चाहता हूं प्यार करना चाहता हूं.

तभी तुम्हारे नखरे शुरू हो जाते है. बस यही कहती रहती हो ये सब प्यार शादी के बाद ही होगा.

 

तभी लड़की गुस्सा हो कर कहती है की हां शादी के बाद ही होना चाहिए ये सब.

 

और मैं तुम्हारी ही तो हूं. मैं आज भी एक कुवारी लड़की ही हूं.
क्योंकि शादी कर के भी मैं आज तक उस गवार के साथ नहीं सोइ हूं.

 

क्योंकि मैंने तुमसे ही सच्चा प्यार किया है.

और अब मैं चाहती हूं की अब तुम मेरे साथ शादी करके मुझे हमेशा के लिए अपना बना लो…

 

और फिर उसके बाद अपनी मर्जी जितना मन करे उतना प्यार करना मे नहीं रोकूंगी.

 

यह सुन कर सुनीता का बॉयफ्रेंड बोलता है तो ठीक है.. मैं जरूर शादी करूंगा.

मगर तुम कम से कम 5 लाख रुपयों का तक शाम तक किसी तरह इंतज़ाम कर लो.

 

मैं तुम्हे एक होटल का पता दे रहा हूं तुम रात तक 10 बजे तक उस होटल पर पहुंच आजाना.

ये सुनीता बोलती है उस गवार के पास कहा होगा पैसा.

बल्कि मेरे पापा ने ही उसे दहेज़ के रूप मे 3 लाख रूपए और कुछ गहने दिये थे.

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गहने तो मेरे पास ही है मगर सारे पैसे उस गवार ने अलमारी मे लोक कर रखे है.

मगर मैं आज जैसे तैसे उस अलमारी की चाभी खोज कर उसमे से पैसे निकाल कर हमेशा के लिए तुम्हारे पास आजाऊंगी.

इतना कह कर लड़की ससुराल लौट जाती है.

लड़की ससुराल पहुंच कर अपने पति और सास से लड़ाई करती है.

और वी उन पर खूब चिल्लाती है.

फिर भी पता नहीं क्यों रमेश और सास सुनीता को की प्रतिक्रिया नहीं देते सब अनसुना करते रहते है.

तभी गुस्से से तिलमिलाती हुई सुनीता अपने कमरे मे चली जाती है.

तभी सुनीता के मोबाइल पर सुनीता के बॉयफ्रेंड का मैसेज आता है.

मैसेज मे लिखा था की कब आरही हो पैसे लेकर कितना वक़्त लगेगा.?

 

सुनीता मैसेज का रिप्लाय करते हुए लिखती है – “सब्र करो!मैं वक़्त पर आजाऊंगी. इतना लिख कर मैसेज send कर देती है.

 

इतने मे रमेश सुनीता के रूम का दरवाज़ा खटखटाते हुए बोलता है. चली खाना खा लो.

सुनीता बोलती है – “मैं खाना तभी खाउंगी ज़ब मुझे इस अलमारी की चाभी दोगे.

रमेश कुछ देर चुप रहता है और कुछ सोच कर अलमारी की चाभी निकाल कर दरवाज़े के नीचे सुनीता के रूम मे खिसका देता है.

 

चाभी देख सुनीता बहुत खुश होती है.

रमेश बोलता है ये लो चाभी और चल कर अब खाना खा लो क्योंकि मैंने और माँ ने अभी तक खाना नहीं खाया है.

माँ ने कहा हम आज साथ बैठ कर ही खाना खाएंगे.

सुनीता कहती है – माँ और तुम खाना खा लो मैं बाहर से ही खाना खा कर आई हूं. भूख नहीं है अब.

ये सुन कर रमेश वहाँ से चला जाता है.

तभी सुनीता जल्दी से चाभी उठाती है और अलमारी खोल देती है.

अलमारी खोलते ही उसकी आँखो के सामने दहेज़ मे मिले हुए पैसे और गहनों के साथ उन पर एक डायरी भी रखी हुई थीं .

सुनीता के मन मे जानने की तीव्र इच्छा हुई की आखिर ये डायरी कैसी जो इतनी संभाल कर रखी गई है.

सुनीता ने डायरी उठाई और खोल कर पढ़ने लगी.

डायरी मे जो लिखा था वो पढ़ कर सुनीता के होश उड़ गए.

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डायरी मे लिखा था – प्रिय पत्नी मैं सब जानता हूं तुम्हारे बारे क्योंकि हमारी शादी से पहले ही तुम्हारे पिता ने मुझे ये सब बता दिया था की तुम किसी लड़के से बहुत प्रेम करती हो.

मगर तुम्हारे पिता जी ने सब पता लगा लिया था की जिस लड़के से तुम प्यार करती हो, उसकी पहले भाई शादी हो चुकी है.

 

वो लड़का पैसों और हवस की खातिर पहले ही कई लडकियो को धोखा दे चुका है.

 

पर आपके पिता जो आपको उस लड़के के बारे मे कुछ भी ना बता सकें. क्योंकि उन्हें पता था की ये जो इश्क का नशा है. वो हमेशा अपनों को गैर और गैरों को अपना बना देता है.

उस समय तुम्हारे पिता जी कुछ भी समझाते तो तुम ना समझ पाती.

इसलिए तुम्हारे पिता ने मुझसे हाथ जोड़ कर कहा की मेरी बेटी का हमेशा ख्याल रखना. एक मजबूर बाप के मुँह से अपनी बेटी की कहानी सुन कर मेरी भी आँखो से आंसू आगए.

 

और मुझे ये यकीन होगा था की एक अच्छा पति होने का सम्मान मुझे मिले या ना मिले मगर एक अच्छा दामाद होने की इज्जत मैं हमेशा पाता रहूँगा.

 

और मुझे दहेज़ मे मिले सारे पैसे और गहने तुम्हारी अलमारी मे रख दिये है.

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क्योंकि दहेज़ के नाम से मुझे नफ़रत हो चुकी थी.

इसी दहेज़ की वजह से मैंने अपनी बहन और पिता को खो दिया.

 

अपने अंतिम समय मे मेरे पिता ने मुझसे कहा था की किसी भी बेटी के बाप से दहेज़ मत लेना बेटा.

 

इसके इलावा उस डायरी मे यह भी लिखा था की तुम मुझसे आज़ाद हो और कहीं भी जा सकती हो.

डायरी के बीच के पन्नो मे तलाख के पेपर रखे है. जहाँ मैंने पहले ही अपने साइन कर दिये है.

 

ज़ब भी तुम्हे लगे की इस गवार के साथ नहीं रहना तब तुम भी इस तलाख के पेपर पर साइन कर के रख देना.

फिर अपने सारे पैसे और ज़ेवर लें कर जा सकती हो.

ये सब पढ़ लेने के बाद डायरी के पन्ने आसुओ से भीगने लगे थे.

सुनीता को खुद पर बहुत गुस्सा आरहा था. सुनीता पति के इस प्रेम और सादगी को समझने लगी थीं.

रमेश के लिखें हर शब्द सुनीता दे दिल मे प्रेम और सम्मान की लहरे पैदा कर चुकी थीं.

 

अपनी धुंधली आँखो से आंसू पोछते हुए सुनीता ने डायरी का ज़ब एक पन्ना पलट करवदेखा तो वहाँ लिखा हुआ था की.

प्यारी पत्नी मैंने तुम्हे इसलिए मारा क्योंकि अपने माँ को बुरा भला बोला. कौन बेटा ऐसा होगा जो अपनी माँ की इतनी बुराई सुनेगा.

 

इसलिए मुझे माफ कर देना मैं गुस्से को काबू ना कर पाया क्योंकि मेरे लिए माँ दर्जा सबसे ऊचा है.

 

और आपको मैं अपना हमसफ़र बना कर अपनी दुल्हन बना कर लाया हूं. आपसे जबरदस्ती करने नहीं.

अब फैसला तुम्हारे हाथो मे है.. दिल से सोच कर फैसला करना.

इतना पढ़ने के बाद सुनीता के हाथ से डायरी छूट जाती है..सुनीता फूट फूट कर रोने लगती है.

 

मानो पश्चात् से सारे आसुओ को निकाल रही हो…

इतने सुनीता के मोबाइल पर फिर से बॉयफ्रेंड की call आती है.

यह देख सुनीता गुस्से मे मोबाइल को स्वीट ऑफ कर देती और उसमे से सिम निकाल कर तोड़ देती है.

 

डायरी मे रखे तलाख के पेपर को फाड़ कर फैंक देती है.

अब सुनीता को समझ आगया था की जिससे वो अब तक प्यार कर रही थीं उसे तो सिर्फ पैसों से प्यार था.

 

जबकि सच्चा प्यार करने वाला तो मेरा पति ही था.

जिसे सब कुछ पता होते हुए भी मुझसे इतना प्यार किया. और पिता का सम्मान भी  रखा.

 

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इतने मे  रोती  हुई आवाज़ मे बोलती है मैं अपने पति का प्यार क्यों नहीं समझ पाई अब तक..

 

 

फिर किसी तरह खुद को सँभालते हुए अपने रूम का दरवाज़ा खोला और जाकर अपनी सास और पति के चरणों मे गिर गई.

 

माँ बहु को उठा कर अपने सीने से लगा लेती है. पति खड़ा देख रहा था और उसकी आँखो मे आंसू भर आए थे.

 

दोस्तों अपने अतीत से सीख लें कर वर्तमान को सुंदर बनाओ और समझदारी से जिओ.

ये story आपको कैसी लगी कमेंट मे जरूर बताना.

 

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